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आक्समिक घटनाओं के लिये योजनायें

सूखा

  1. बीज टुकड़ों को चूने के संतृप्त घोल से उपचार
  2. नेत्रजन और पोटाश का पत्तों पर स्परे
  3. पोटाश की 25% अतिरिक्त मात्रा द्वारा उपचार
  4. गन्ना अवशेषों का मल्च के रूप में प्रयोग

जब गन्ने को खाँचों में रोपित किया जाता है तो एक एक खाँचे को छोड़कर कम पानी से सिंचाई कर सूखे प्रभाव को कम किया जा सकता है। टपक सिंचाई से पानी प्रयोग क्षमता को बढ़ाया जा सकता है जिससे कम पानी से अधिक प्रभावी सिंचाई की जा सकती है। टपक सिंचाई से पानी की 40% बचत की जा सकती है।

सूखा सहनशील प्रजातियों जैसेकि को. 86032, को. 85019, को. 94008, को. 94012, को. 99004, को. 0218, को. 0403, को. 06027 और को. 2001-13 प्रजातियों को भारत के प्रायःद्विपीय क्षेत्र में और को. 98014, को. 0238, को. 0124, को. 0239 और को. 0118 प्रजातियों को उत्तरी भारत क्षेत्र में रोपित कर फसल के दौरान सूखे के प्रभाव के खतरे को कम किया जा सकता है।

जलप्लावन

जलप्लावन सहनशील कृन्तकों, जैसेकि को. 8371, को.टी.एल 88322, को. 0124, को. 0237, को. 0239 और को. 99006 को जलप्लावन उद्यत क्षेत्र में रोपित कर जलप्लावन हालात के खतरों को संवेदनशील संवर्धन प्रवस्था के दौरान कम कर गन्ना उत्पादन पर प्रभाव को कम किया जा सकता है।

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