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गन्ने की खेती के क्रिया कलापों की समय सारणी

समान्य

दक्षिणी भारत में गन्ने की खेती को मुख्यतयः अदसाली और इकसाली रोपित फसलों में बांटा जा सकता है जबकि उत्तरी भारत में इसे बसंत और पतझड़ रोपित फसलों में बांटा गया है। इस प्रलेख से संलगित तालिकाओं में पौधा और पेड़ी फसलों में किये जाने वाले समान्य क्रियाकलापों की समय सारणी दी गई है।

सूचनार्थ: तमिल नाडू में किये जाने वाले क्रियाकलापों की समय सारणी को डाउनलोड किया जा सकता है।


सूचनार्थ: जल प्रबंधन और सिंचाईयों के बीच अन्तराल को वर्षा और वातावरण की नमी की मात्रा के आधार पर तय किया जाना चाहिये। रेतीली भूमियों में सिंचाई अन्तराल को कम करें जबकि काली मृदाओं में इसे बढ़ा देना चाहिये।.

पौधा फसल: 30 दिनों तक

पौधा फसल में 30 दिनों तक किये जाने वाले समान्य क्रियाकलापों की समय सारणी:

Time Schedule Recommended Operations
रोपण से पहले
  1. भूमि की जुताई 45 सैंटीमीटर गहराई तक करें
  2. खेत में 25 टन/है0 की दर से अच्छी तरंह से गली सड़ी खलिहान खाद (FYM) या अपघटित शीरा या कम्पोस्ट को खेत में डाल ट्रैक्टर के साथ गहरी जुताई कर मिला दें
  3. खेत में 10 मीटर लम्बी 20 सैंटीमीटर ऊँचाई वाली मेढ़ व खाँचे 80 सैंटीमीटर दूरी पर बनायें
  4. खाँचों में 375 किलोग्राम सुपरफास्फेट प्रति है0 डालें
रोपण दिवस पर:
  1. छः से आठ महीने की नर्सरी से 75,000 दो कलिकाओं वाले बीज टुकड़ों का चुनाव करें या एक कलिका वाले बीज टुकड़ों को पोली बैगों में रोपित कर उत्पादित नर्सरी पौध का प्रयोग करें
  2. बीज टुकड़ों को 125 ग्राम बैविस्टिन, 2.5 किलोग्राम यूरिया और 2.5 किलोग्राम चूने का 250 लिटर पानी में घोल बनाकर उसमें 10 मिन्ट डुबोयें
  3. बीज टुकड़ों को 2 सेंटीमीटर गहराई पर कलिकाओं को बाजु रखते हुए रोपित करें
  4. हर 10वें खाँचे में बीज टुकड़ों की एक के बजाये दो पंक्तियां रोपित करें
रोपण के तीसरे दिन: हस्त स्परेयर से 2.5 किलोग्राम/है0 की दर से एट्राटाफ 500 लिटर पानी में मिला खरपतवार नियन्त्रण के लिये स्परे करें
रोपण के 5वें दिन: मेढ़ों पर 15 सेंटीमीटर की ऊँचाई तक गन्ना अवशेषों को फैलायें.
रोपण के 25वें दिन: हर 10वीं पंक्ति में में दुगने रोपण किये गये बीज टुकड़ों से उखाड़े गये पौधों से या फिर पोलीबैग उतादित पौधों से खेत में रिक्त स्थानों की पूर्ति करें.

पौधा फसल: 30-120 दिनों तक

पौधा फसल में 30 - 120 दिनों तक किये जाने वाले समान्य क्रियाकलापों की समय सारणी:

Time Schedule Recommended Operations
रोपण के 30वें दिन: पाँच किलोग्राम एज़ोस्परिलियम और 5 किलोग्राम फास्फोबैक्टीरियम को, 250 किलोग्राम पौडर की गई खलिहान खाद के साथ मिलाकर, पौधों के निकलने वाले स्थानों पर डालकर साथ ही पानी लगा दें
रोपण के 35वें दिन से:
  1. रोपण के 35वें से 100वें दिन तक हर 7 से 10 दिन के बीच सिंचाई करें
  2. कंसूऐ के आक्रमण से बचने के लिये कलोरोपाइरिफास को 250-300 ग्राम क्रियाशीलतत्व/है0 की दर से बीज टुकड़ों पर डालकर मिट्टी से ढक दें
  3. यदि 25-30% शाखायें कंसूऐ से प्रभावित हों तो कलोरोपाइरिफास के 250-300 ग्राम क्रियाशीलतत्व/है0 को पानी में मिलाकर हस्त स्परेयर की मदद से शखाओं की चोटि व तने के आधार पर स्परे करें
रोपण के 45वें दिन:
  1. खरपतवारों को हस्त चलित यन्त्रों द्वारा निकालें
  2. खडडों में 110 किलोग्राम यूरिया, 60 किलोग्राम पोटाश और 35 किलोग्राम नीमकेक प्रति है0 की दर से डालें
रोपण के 60 - 120 दिन के बीच:
  1. सूखे के हालात में 2.5% यूरिया व 2.5% पौटाशियम कलोराइड के घोल को स्परे करें
  2. पाँच किलोग्राम एज़ोस्परिलियम और 5 किलोग्राम फास्फोबैक्टीरियम को 250 किलोग्राम पौडर की गई खलिहान खाद के साथ मिलाकर 60वें दिन पर पौधों के निकलने वाले स्थानों पर डालकर साथ ही पानी लगा दें
  3. रोपण के 90 दिन बाद हाथों से खरपतवार निकालें और मिट्टी चढाने के बाद खडडों में 110 किलोग्राम यूरिया, 60 किलोग्राम पोटाश और 35 किलोग्राम नीमकेक प्रति है0 की दर से डालें
  4. रोपण के 120 वें दिन सूखे के हालातों में 60 किलोग्राम/है0 पोटाश की मात्रा डालकर साथ ही सिंचाई करें

पौधा फसल: 120 दिनों से कटाई तक

पौधा फसल में 120 दिनों से कटाई तक के क्रिया कलापों की समय सारणी:

Time Schedule Recommended Operations
120th day after planting: Under drought conditions, apply 60 kg of potassium and irrigate immediately
रोपण के 150वें दिन से 225वें दिन तक
  1. रोपण के 150वें दिन पर गन्ने की सूखी पत्तियां तने से उतारें
  2. अगर पोरी बेधक पाया जाये तो हर 15वें दिन 6 बार इसके परजीवियों को 5 सी.सी./है0 की दर से छोड़ा जाये
  3. 101 से 210 दिन के बीच हर 7वें दिन खेत में सिंचाई करें
  4. 210वें दिन पर फिर गन्ने की सूखी पत्तियां तने से उतारें गिरे गन्नों को बांधें
  5. मिली बगॅस, सफेद मक्खी और स्केलस् के नियन्त्रण के लिये 225वें दिन पर मोनोक्रोटोफास 36 एस.एल. 600 ग्राम क्रियाशील तत्व/है0 की दर से स्परे करें
रोपण के 260वें दिन अगर आवश्यक हो तो पाइरिल्ला और सभी चूसक कीटों के नियन्त्रण के लिये डाइकलोरवास 76% ई.सी. 300 ग्राम क्रियाशील तत्व/है0 की दर से स्परे करें
रोपण के 270 से 360वें दिन तक
  1. हर 15वें दिन सिंचाई करें
  2. कटाई से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें
कटाई के समय गन्नों को भूतल के बिलकुल पास से दराती या तेज़ धारदार चाकू से काटें; गन्नों को मिल में भेजने से पहले उनसे अवशेषों, जड़ों, जलीय शाखायें उतारें और तने के शिखरों को काटें

पेड़ी फसल: 35 दिनों तक

पेड़ी की फसल में 35 दिनों तक किये जाने वाले समान्य क्रियाकलापों की समय सारणी:

Time Schedule Recommended Operations
1 से 3 दिन तक
  1. पेड़ी की शुरुआत के समय गन्ना अवशेषों को हटाऐं, स्टब्बल को एक समान उपयुक्त नमी के हालात में तेज़ धारदार कुदाल से काटें
  2. खेत में 15 टन/है0 की दर से अच्छी तरंह से गली सड़ी खलिहान खाद या 25 टन अपघटित शीरा या 25 टन कम्पोस्ट को 375 किलोग्राम सुपाफास्फेट 75 किलोगाम पी.2ओ.5, 135 किलोग्राम नेत्रजन और 35 किलोग्राम नीमकेक प्रति है0 को मिलाकर खड्डों में खेत में डाल दें
  3. इसके एकदम बाद सिंचाई करें और मेढ़ों को बगल से इस प्रकार काटें ताकि डाली गई खाद समग्री मृदा में अच्छी प्रकार मिल जाये
  4. हस्त स्परेयर से 2.5 किलोग्रा/0 की दर से एट्राटाफ 500 लिटर पानी में मिला खरपतवार नियन्त्रण के लिये स्परे करें
9 वें और 10वें दिन:
  1. पाँच किलोग्राम एज़ोस्परिलियम और 5 किलोग्राम फास्फोबैक्टीरियम को 250 किलोग्राम पौडर की गई खलिहान खाद के साथ मिलाकर पौधों के निकलने वाले स्थानों पर डालकर साथ ही पानी लगा दें
  2. पौधा फसल से प्राप्त गन्ना अवशेषों को खाँचों पर फैला दें
25वें से 30वें दिन तक
  1. उगे हुए पौधों से रिक्त स्थानों को भरें
  2. कंसूऐ के आक्रमण से बचने के लिये 250-300 ग्राम क्रियाशील तत्व/है0 कलोरोपाइरिफास पौधों के पास डालकर मिट्टी से ढक दें
35वें दिन पाँच किलोग्राम एज़ोस्परिलियम और 5 किलोग्राम फास्फोबैक्टीरियम को 250 किलोग्राम पौडर की गई खलिहान खाद के साथ मिलाकर पौधों के निकलने वाले स्थानों पर डालकर साथ ही पानी लगा दें

पेड़ी फसल: 35 दिनों से कटाई तक

पेड़ी की फसल में 35 दिनों से कटाई तक के क्रिया कलापों की समय सारणी:

Time Schedule Recommended Operations
35वें से 90 दिनों तक हर 10वें दिन पर सिंचाई करें
60वें दिन
  1. खरपतवारों को हस्त चलित यन्त्रों द्वारा निकालना
  2. खडडों में 110 किलोग्राम यूरियाए 60 किलोग्राम पोटाश और 35 किलोग्राम नीमकेक प्रति है0 की दर से डालकर हल्कि मिट्टी से ढक दें
90वें दिन सूखे के हालातों में 50 किलोग्राम अतिरिक्त पोटाश की मात्रा प्रति है0 डालें
91वें से 250 दिन तक सूखे के हालातो में 2.5% यूरिया व 2.5% पोटाशियम कलोराइड के घोल को स्परे करें
120वें दिन सूखी पत्तियां तने से उतारें और अच्छे से मिट्टी चढ़ायें
180वें दिन सूखी पत्तियां तने से दोबारा उतारें
121वें दिन से 210 दिन तक जब आवश्यक हो तब हर 15 दिन में एक बार ट्राईकोग्रामा परजीवियों को छोड़ें
210वें दिन मिली बगॅस, सफेद मक्खी और स्केलस् के नियन्त्रण के लिये 225वें दिन पर मोनोक्रोटोफास 36 एस.एल. 600 ग्राम क्रियाशील तत्व/0 की दर से स्परे करें
251वें दिन से 360 दिन तक हर 15वें दिन सिंचाई करें और कटाई से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें
कटाई के समय गन्नों को भूतल के बिलकुल पास से दराती या तेज़ धारदार चाकू से काटें; गन्नों को मिल में भेजने से पहले उनसे ट्रैश, जड़ों, जलीय शाखायें और तने के शिखरों को काटें

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