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मशीनीकरण

मशीनीकरण

गन्ने में मशीनीकरण क्यों?

पारमपरिक प्रणाली में गन्ने के एक एकड़ (0.4 है0) में खेती करने के लिये आदमी के करीब 1170 घंटों और बैलों की जोड़ी के 130 घंटे कार्य करने की आवश्यक्ता होती है जो बड़ी मेहनत वाला कार्य है जिससे यह न केवल नीरस लगता है बल्कि इससे लागत भी बढ़ जाती है। इससे भी अधिक समस्या तब और भी बढ़ जाती है जब मज़दूर गन्ने के खेतों में काम करने के लिये तैयार नहीं होते क्योंकि खेती के अलावा दूसरे क्षेत्रों में काम करना उन्हें आकर्षक लगता है और उन्हें मज़दूरी भी अधिक मिलती है। पंजाब व हरियाणा के राज्यों में जहां फार्म में मशीनों का उपयोग काफी अधिक है वहां परिवारिक मज़दूरी को छोड़कर खेती की लागत 35,000 प्रति एकड़ है; इसमें से करीब कुल लागत का 45-48% इन्सानों की मज़दूरी में जाता है और 15-16% खर्चा मशीनरी के किराये, जिसमें स्थानान्तरण का खर्चा भी शामिल है, पर आता है। अतः गन्ने की खेती से शुद्ध लाभ बढ़ाने के लिये उत्पादन प्रणाली में खर्चे में कार्यसाधक्ता को लाना होगा। इन्सानी मज़दूरी के खर्चे को मशीनीकरण के द्वारा ही कम से कम करके खेती की लागत को घटाया जा सकता है। विकसित देशों में कृषि उत्पादक्ता में उल्लेखनीय प्रगति मशीनीकरण के द्वारा ही आई है। मशीनीकरण से समय की बचत, खेती के कामों में सुनिश्चित्ता, निवेश की प्रयोग क्षमता में प्रगति और अधिक उत्पादक्ता के कारण यह आवश्यक है की हम गन्ने की खेती को कुछ हद तक मशीनीकृत करें। इस दिशा में हमें गन्ने की मशीनरी, जैसेकि गन्ने का कट्टर प्लांटर, खेती के अन्तर-कल्चर यन्त्र, ट्रैक्टर पर लदे छिड़काव यन्त्र और गन्ना कटाई मशीनें , जो देश में उपलब्ध हैं उन्हें लोकप्रिय बनाने की दिशा में कार्य करना होगा। यदि किसी मशीन की कीमत अधिक है तो उसे किराये पर सहकारिता से उपलब्ध कराया जाये।

खेत की तैयारी

खेत की तैयारी

वर्ष में एक बार शुरूआती जुताई में डिस्क हल और मोल्ड बोर्ड हल का प्रयोग किया जाये। दूसरी जुताई क्रियाओं में भूमि सम्तलक, टाइने और डिस्क हैरो तथा रोटावेटर का प्रयोग किया जा सकता है। रोटावेटर को रोपण से पहले पेड़ी फसल उगाने के लिये कटाई के बाद मृदा को चूर चूर करने और गन्ने के अवशेषों को काटने, कसने और मिलाने के लिये प्रयोग किया जा सकता है। खेत की तैयारी के बाद, मेढ़ के साथ साथ बाँध बनाने वाली मशीन को सिंचाई के लिये नालियों और खेत के बीच और चारों और मेढ़ बनाने के लिये प्रयोग किया जा सकता है। हरि खाद फसल जैसेकि डैन्चा (12 किलोग्राम बीज/एकड़) को गन्ने की फसल रोपित करने से पहले बीजा जाता है। सारी फसल को 45 दिन के बाद वहीं मृदा में डिस्क हैरो का दो बार प्रयोग कर मिला दिया जाता है, फिर एक हफते के सड़न के बाद इसे फिर डिस्क हैरो से पल्टा दिया जाता है। डैन्चा में करीब 0.62% नेत्रजन होती है जिससे मृदा को करीब 40 किलोग्राम नेत्रजन/एकड़ मिल जाती है। इस तरंह से मिलाई हरि खाद से मृदा पर लाभकारी प्रभावों से गन्ना उत्पादन में 4-7 टन/है0 की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

रोपण में मशीनीकरण:

Tractor drawn cutter-cum-planter

उपोषणकटिबंधीय भारत में गन्ने का रोपण परमपरागत समतल प्रणाली और मेढ़ों व खाँचों वाली प्रणाली से किया जाता है यद्यपि विशिष्ट प्रणालियों, जैसेकि द्विपंक्ति रोपण, खाई रोपण और गोलाकार खड्डा रोपण विधियां, को प्रोत्साहित किया जा रहा है। समतल प्रणाली में देसी हल से, खेत में जब नमी का स्तर इसकी क्षमता के अनुसार होता है, खेत की बार बार जुताई की जाती है जिसके बाद हर बार तख्ते से इसे सघन कर दिया जाता है। रोपण के समय 8-10 सेंटीमीटर ही गहरी खाँचें हल से 75 सेंटीमीटर की दूरी पर खोली जाती हैं और इनमें हल के पीछे पीछे हाथ से बीज टुकड़ों को रखा जाता है और तख्ते की मदद से इन्हें मिट्टी से ढक दिया जाता है। इस प्रणाली में मज़दूरों की बहुत बड़ी आवश्यक्ता होती है। मेढ़ों और खाँचों वाली प्रणाली में ट्रैक्टर से खींचे गये मेढें बनाने वाले यन्त्र द्वारा 15 सेंटीमीटर गहरी खाँचें 90 सेंटीमीटर की दूरी पर निकाली जाती हैं। बीज टुकड़ों को इनमें रखकर हाथों की मदद से ढक दिया जाता है। इस विधि में ट्रैक्टर से खींचे गये मेढें बनाने वाले यन्त्र का उपयोग सस्ता पड़ता है। इस विधि में 90 सेंटीमीटर की दूरी ट्रैक्टर से खींचे जाने वाले यन्त्रों के उपयोग को सम्भव बनाता है और अन्तर-कल्चर प्रक्रियाओं, जैसेकि खरपतवार उन्मूलन और मिट्टी चढ़ाने के कार्य को पावर टिल्ल्र की मदद से, किया जा सकता है।

अकेली और द्विपंक्ति रोपण

अकेली और द्विपंक्ति रोपण

Trench maker that can be attached behind a tractor

भारत के कुछ भागों में जहां मृदायें हल्के बनावट वाली या लवण्ता वाली या लवण्ता वाले पानी से सींचित हैं, वहां खाईयों में अकेली पंक्ति और द्विपंक्ति वाली प्रणालियों से रोपण किया जाता है। इसमें अंग्रेजी के यू के आकार की खाइयां, ट्रैक्टर पर लदे हुए, खाईयां खोदने वाले यन्त्र द्वारा बनाई जाती हैं, जो 25 सेंटीमीटर गहरी और 90 सेंटीमीटर पंक्तियों की बीच की दूरी पर खोदी जाती हैं। इस यन्त्र से एक बार में दो खाईयां खोदी जाती हैं और इसके दोनो और अन्तर-पंक्ति मार्ग दर्शक द्वारा, जो दोनो और फिट किये होते हैं, दो दो खाईयां खोदी जाती हैं। बीज टुकड़ों को खाईयों में सीधे या आड़े रखा जाता है। दूसरी तरफ द्विपंक्ति रोपण प्रणाली में मेढ़ बनाने वाला यन्त्र बीच में 120 ऊँची क्यारी, जिसके दोनो और दो दो खाँचें 30 सेंटीमीटर की दूरी पर बनाता है। अगली बारी में पहले वाली दो खाँचें वही रहती हैं जबकि दो नई खाँचें क्यारी के दूसरी और बनती हैं।

इस प्रकार क्यारी के दोनो और के खाँचों के केन्द्रों की दूरी 120+30 सेंटीमीटर रहती है। गन्ने के बीज टुकड़ों को खाँचों के दोनो और तल पर हाथों से रखे जाते हैं और उस पर हलकि मिट्टी चढ़ाई जाती है। सिंचाई केवल खाँचों में की जाती है। इस विधि में पत्तियो द्वारा सौर ऊर्जा का अवरोध अच्छा हो पाता है अतः बेहतर उत्पादन होता है। ऊँची क्यारियों पर दूसरी फसलों, जैसेकि लहसुन, प्याज, चना, कद्दू, आलू और टमाटर इत्यादि की बिजाई कर अधिक लाभ कमाया जा सकता है इससे खाईयां बनाने के थोड़े से अधिक खर्चे की भी आपूर्ति हो जाती है।

गोलाकार खड्डों, खाईयों, नालियों में

मशीनों की मदद से गोलाकार खड्डों, खाँचों और खाईयों का बनाना

tractor mounted pit-maker

गोलाकार खड्डों की रोपण प्रणाली, मेढ़ों और खाँचों वाली विधि से, 20-26% अधिक उत्पादन देती है जिसके साथ टपक सिंचाई प्रणाली को प्रयोग किया जा सकता है और इससे 4 से 5 वर्ष तक पेड़ी की सफल फसलें ली जा सकती हैं। इस प्रणाली में 60 सेंटीमीटर व्यास के गोलाकार 30 सेंटीमीटर गहरे खड्डे, ट्रैक्टर पर लदे खोदने वाले यन्त्र से, खोदे जाते हैं। यह यन्त्र एक पंक्ति में खड्डा खोदने वाला या एक समय में दो खड्डे खोदने वाला हो सकता है। चारों और से दो खड्डों के बीच की दूरी 60 सेंटीमीटर रखी जाती है और एक एकड़ में करीब 2700 खड्डे बनते हैं। इन खड्डों को 15 सेंटीमीटर तक मिट्टी और खलियान खाद से फिर भर दिया जाता है। करीब 22, दो कलिकाओं वाले, बीज टुकड़ों को हर खड्डे में इस प्रकार रखा जाता है जैसे साईकल की तारें पहिये में लगी रहती हैं। फिर बीज को 5 सेंटीमीटर मिट्टी की परत से ढक दिया जाता है।

Trench maker attached to a tractor खाँचों और खाईयों वाली रोपण प्रणालियों में बीज टुकड़ों की कटाई, इनका खाँचों में रखा जाना और मिटृटी से ढकना हाथों से किये जाने के कारण इसमें अधिक समय लगता है तथा मज़दूरी लागत भी बढ़ जाती है। इसको देखते हुए स्वःचलित, ट्रैक्टर पर लदे कट्टर प्लांटर के कई माडल मार्किट में आ गये हैं, जो खाँचों को खोलने तथा बीज टुकड़ों को काटने व रखने, उर्वरकों व पैस्टीसाईड्स के खाँचों में डालने व मिटृटी से ढकने के कार्य को एक ही बार में कर देते हैं। एक द्विपंक्ति कट्टर प्लांटर, जिसे भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में डिज़ाइन किया गया है और इसे 25 एच.पी. या उससे ऊपर ताकत वाले ट्रैक्टर पर लादा जा सकता है, और यह 75 सेंटीमीटर की पंक्तियों की दूरी पर रोपण करता है। इस मशीन पर 3 लोगों की आवश्यक्ता होती है - एक ड्राइवर और दो इस इकाई में गन्ना डालने का काम करते हैं। इस मशीन से 4 घंटों में एक एकड़ में रोपाई की जा सकती है। यह मशीन परमपरागत हाथ से रोपण विधि से सस्ती है और बिजाई के एकदम बाद हलकि सिंचाई करने से पानी कहीं रुकता नहीं है और इससे करीब 50% का अंकुरण देखा गया है।

अन्तर कल्चर प्रक्रियायें

अन्तर कल्चर प्रक्रियायें

गन्ना फसल में अन्तर कल्चरल प्रक्रियायें, जैसेकि मृदा को ढीला करना, हेंगा फेरना (harrowing) और खरपतवार निकालने का कार्य, कर सकने वाला जुताई यन्त्र गन्ना प्रजनन संस्थान कोयम्बत्तूर द्वारा डिज़ाइन किया गया और ट्रैक्टर पर लदा जा सकने वाला है। इसके टाईनों को, दो पथों पर, हर पिछले टायर के पीछे टांग दिया जाता है। हर पथ की चैढ़ाई 53 सेंटीमीटर की होती है। विभिन्न परिस्थितियों में ट्रैक्टर के पहियों की स्थिति को अनुकूल बनाना पड़ सकता है। ट्रैक्टर के पिछले पहियों के बीच की दूरी पहियों की उल्टी स्थिति कर इसे 102 और 144 सेंटीमीटर पर रखा जा सकता है। इसके दो पहियों के बीच 144 सेंटीमीटर की दूरी के कारण, 90 सेंटीमीटर दूरी पर रोपित फसल में, ट्रैक्टर आसानी से फसल में गुज़र सकता है। फसल को खरपतवारों से मुक्त रखने के लिये अन्तर कल्चरल प्रक्रियाओं को रोपण के 45-50, 65-70 और 95-100 दिनों के बाद करना आवश्यक है। फसल के रोपण के 100 से 120 दिन बाद तक फसल के बीच इसे बिना किसी नुकसान के चलाया जा सकता है। इससे एक घंटे में 1.5 एकड़ खेत के कार्य को सम्पन्न किया जा सकता है। एक और ट्रैक्टर पर लदा जा सकने वाला पैग-टाइप (peg-type) जुताई यन्त्र 60 सेंटीमीटर दूरी पर रोपित की गई फसल में अन्तर कल्चर प्रक्रियाओं और खरपतवार निकालने के लिये उपयुक्त है। इसमें 3 पथों वाली टाईन्स हैं। एक बार खेत की एक दिशा में इसके जाने से 3 पंक्त्यिों में हेंगा फिर जाता है और खरपतवार निकल जाते हैं। यह जुताई यन्त्र किसी भी तरंह के ट्रैक्टर पर काम कर सकता है और इसके पहियों में बिना किसी बदलाव के 60 सेंटीमीटर दूरी की पंक्तियों में रोपित फसल में इससे काम लिया जा सकता है। इससे एक घंटे में 2 एकड़ खेत के कार्य को सम्पन्न किया जा सकता है।

2-lane and 3-lane inter cultivators

गन्ना प्रजनन संस्थान कोयम्बत्तूर द्वारा डिज़ाइन किये गये 2 या 3 पंक्तियों में मेढ़ बनाने वाले यन्त्रों से खड़ी फसल में मिट्टी चढ़ाई जा सकती है। द्विपंक्ति मेढ़ बनाने वाले यन्त्र को 90 सेंटीमीटर दूरी पर रोपित फसल में ट्रैक्टर के पिछले पहियों को उल्टा लगा कर इसे प्रयोग किया जा सकता है। तीन पंक्तियों में मेढ़ बनाने वाले यन्त्र को 75 सेंटीमीटर दूरी पर रोपित फसल में ट्रैक्टर के पिछले पहियों को बिना उल्टा लगाये इसे प्रयोग किया जा सकता है।

फसल सुरक्षा

फसल सुरक्षा में मशीनीकरण

ट्रैक्टर द्वारा प्रयुक्त होने वाला, पट्टी में तेज़ी से फैलने वाला छिड़काव यन्त्र रसायनों के छिड़काव के लिये उपयुक्त है। इस यन्त्र में 400 लिटर क्षमता की छिड़काव टैंकी है, एक दबाव घर जिसे ट्रैक्टर की पी.टी.ओ. शाफट द्वारा संचालित किया जाता है, एक नाली से पानी लेने/भरने के लिये खींचने वाली रबड़ की नली जिसमें छलनी लगी है, 50 मीटर लम्बी रबड़ की छिड़काव वाली नली जिसके साथ बढ़ाने के लिये छड़/छिड़काव वाली नोज़ल बन्दूक जुड़ी है और तह की जा सकने वाली व तेज़ी से फैलने वाली छिड़काव पट्टी, जिसके साथ खोखली कोन वाली 20 नोज़लें जुड़ी हैं। तेज़ी से फैलने वाला छिड़काव यन्त्र एक समय में 600 सेंटीमीटर चैढ़ी पट्टी को ढक लेता है। इस यन्त्र का प्रयोग खरपतवार नाशियों, यूरिया व पैस्टीसाइड्स के छिड़काव के लिये किया जा रहा है। यदि कभी कोई खेत गीला भी है और उसमें ट्रैक्टर नहीं चल सकता (जैसेकि रोपण के एकदम बाद), तब उस लम्बी नली, जिसके साथ तेज़ी से फैलने वाली नोज़ल लगी है, का प्रयोग किया जा सकता है (उदाहरण के लिये एट्राजिन का छिड़काव)। फसल वृद्धि के शुरुआती 3 महीनों में ट्रैक्टर पर लदे छिड़काव यन्त्र के दोनो और के छिड़काव पट्टियों/पंखों को खोलकर खेत में से निकालते हुए यूरिया या कीटनाशियों का छिड़काव (पौधा फसल में कंसूए और पेड़ी फसल में काली कीड़ी के नियन्त्रण के लिये) किया जा सकता है। एक मज़दूर की सहायता से करीब 0.5 से 1.0 एकड़ के खेत में एक घंटे में छिड़काव किया जा सकता है।

पेड़ी सम्बंधी (Ratooning)

पेड़ी फसल प्रबंधन में मशीनीकरण

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR), लखनऊ का, ट्रैक्टर पर लद सकने वाला, पेड़ी प्रबंधन यन्त्र एक और उपयोगी उपकरण है। इस उपकरण से स्टब्बलों को ज़मीन के पास से मूंढने, खुदाई, मेढ़ों को तोड़ने और मिट्टी चढ़ाने के कामों को एक या दो बार खेत में से ट्रैक्टर को निकाल कर किया जा सकता है। स्टब्बलों को तीखे किनारों वाले दांतों और अवतल कताई वाले चक्र से काटा जाता है। मिट्टी चढ़ाने वाली इकाई में, सांचे में ढाला गया, तख्ता स्टब्बलों के ऊपर मिट्टी की परत एक मेढ़ के रूप में देने का काम करता है। यह उपकरण खलिहान खाद और उर्वरकों को मृदा में रखने के साथ साथ तरल कीटनाशियों को मृदा में डालने का काम भी करता है। यह उपकरण, पेड़ी की फसल में, हाथ से किये गये 6 घंटे के काम को 1.0 से 1.5 घंटे में कर सकता है।

Device for ratoon management

परिदृश्य

गन्ना उत्पादन में मशीनकरण का परिदृश्य

गन्ने के रोपण में 140 श्रम घंटों और बैलों की जोड़ी के 12 घंटे प्रति एकड़ कार्य की आवयश्क्ता होती है और इसमें 3180 रुपये की लागत आती है जिसे कम करके 2500 रुपये तक, ट्रैक्टर / मशीनरी के प्रयोग से, लाया जा सकता है। ट्रैक्टर द्वारा खींचे गये गन्ना रोपण उपकरण तकनीकी और अर्थिक दृष्टि से बेहतर हैं। देश भर के कृषि विभाग व चीनी मिलों के पास या तो खाईयां खोलने, खड्डे खोदने और गन्ना रोपण/बिजाई के उपकरण हैं या फिर वह उन उपकरणों के प्रयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। किसान इन उपकरणों को किराये पर लेकर प्रयोग कर सकते हैं। अन्तर कल्चर बहुउद्देशीय उपकरणों को प्रयोग कर गन्ने की फसल में हाथ से किये जाने वाले काम के कुल 5570 रुपये/एकड़ के खर्च को, तीसरे हिस्से तक, कम किया जा सकता है। टाईन जुताई यन्त्र और मिट्टी चढ़ाने के लिये मेढ़ बनाने वाली मशीनों को किसानों के बीच लोकप्रिय बननाने की दिशा में कार्य करने की आवश्यक्ता है। गन्ने की हाथ से कटाई, लदाई और मिल तक ले जाने के लिये 396 श्रम घंटों की आवश्यक्ता होती है और इसमें कुल खर्चा 8750 रुपये प्रति एकड़ है और यह फसल पर आई कुल लागत का 24% है। भारत में कोई उपयुक्त गन्ना काटने की मशीन नहीं है अतः इसे जलदी से विकसित करने की आवश्यक्ता है। विदेशों में उपलब्ध गन्ना काटने की मशीनों को अधिक दूरी वाली पंक्तियों में रोपित (150 से 180 सेंटीमीटर की दूरी) गन्ना फसलों के लिये डिज़ाइन किया गया है। हम भी अपनी प्रजातियों को अधिक दूरी वाली पंक्तियों में रोपित कर मूल्यांकन कर रहे हैं। फार्म के मशीनीकरण के लिये ट्रैक्टर एक मूलभूत आवश्यक्ता है। हमारे क्षेत्र में ट्रैक्टर के काफी मालिक होने के बावजूद भी खेत की तैयारी के अलावा मशीनरी का प्रयोग अभी तक तेज़ी नहीं पकड़ पाया है। हिस्सेदारों की सहक्रियाशील प्रयत्नों से यह आशा की जाती है की गन्ने की खेती के मशीनीकरण का कार्य जल्द ही पूरा हो पायेगा।

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