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अनुसंधान केन्द्र - अगली

केन्द्र के बारे मे

केन्द्र के बारे मे

अगली अनुसंधान केन्द्र, जि़ला पालघाट, केरल राज्य में मुख्य संस्थान, कोयम्बत्तूर से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसे 1994 में स्थापित किया गया था और इसने 1999 में कार्य करना प्रारम्भ कर दिया था।

Agali Research Centre

अधिदेश

  • गन्ने के जर्मप्लास्म की विशिष्ट स्वीकृतियों का अनुरक्षण
  • गन्ने में दूरस्थ संकरण बनाने में मदद करना और राष्ट्रीय संकरण कार्यक्रम को आगे बढ़ाना
  • अधिदेशित फसलों की बेमौसमी नर्सरी उगाने के लिये सुविधा व्यवस्थित करना

केन्द्र के कार्यकारी विज्ञानिक

डा0 आर. करुप्पियन
वरिष्ठ विज्ञानिक (पादप प्रजनन)
ई-मेल: यह ईमेल पता spambots से संरक्षित किया जा रहा है. आप जावास्क्रिप्ट यह देखने के सक्षम होना चाहिए.
दूरभाष: 04924-254549.

केन्द्र का पता

गन्ना प्रजनन संस्थान अनुसंधान केन्द्र,
अगली, कोटाथारा के रास्ते,
अनाई कट्टि, केरल।

जर्मप्लास्म

गन्ने के जर्मप्लास्म का अनुरक्षण

किसी भी फसल में प्रजातियों के विकसित करने में जर्मप्लास्म का अनुरक्षण एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है। गन्ने के जर्मप्लास्म का एक बहुत बड़ा 1643 कृन्तकों का संग्रहण (जिसमें 119 एस. आफिशनेरम, 7 एस.रोबस्टम, 14 एस. बारबेरी और एस. साईनेंस, 25 विदेशी कृन्तक, 310 जैनेटिक स्टाक्स, 196 एन.एच.जी. कृन्तक, 207 को. गन्ने इत्यादि) इस केन्द्र की स्थापना के समय से यहां इस स्थान पर अनुरक्षित है, जिन्हें वत्र्तमान या आने वाले समय में गन्ना प्रजाति विकास कार्यक्रमों में प्रयोग किया जा सकता है।

राष्ट्रीय संकरण सुविधा

राष्ट्रीय संकरण सुविधा

एक राष्ट्रीय संकरण सुविधा को वर्ष 2000 में सक्रिय बना दिया गया। देश में यहां गन्ने में दूरस्थ संकरण की अपने आप में एक अनोखी सुविधा है। प्रत्येक वर्श पूरे देश से कई विज्ञानिक यहां, अपने क्षेत्रों के लिये बेहतर प्रजातियों के विकास के लिये, क्रासिस बनाते हैं। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (उत्तर प्रदेश), शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश), सिओरहि (उत्तर प्रदेश), पूसा (बिहार), मांडया (कर्नाटक), अनाकापल्लि (आन्ध्र प्रदेश), वुयुरु (आन्ध्र प्रदेश), उचानी (हरियाणा), वी.एस.आई. (महाराष्ट्र), कुडालूर (तमिल नाडू) और थिरुवल्ला (केरल) से विज्ञानिक प्रजातियों के विकास के लिये यहां क्रासिस बनाते हैं। प्रतिवर्ष बनाये गये क्रासिस का विवरण नीचे तालिका में दिया जा रहा है:-

वर्ष बनाये गये क्रासिस की संख्या भाग लेने वाले संस्थानों/ केन्द्रों की संख्या
2001 49 5
2002 88 4
2003 125 12
2004 352 11
2005 570 11
2006 160 11
2007 224 8
2009 145 7
2010 200 10
2011 162 8
2012 601 21
2013 591 22


बे-मौसमी नर्सरी

राष्ट्रीय बे-मौसमी नर्सरी

यह केन्द्र अधिदेशित फसलों के बीजों के बहुगुणन और उनकी सन्त्तियों को आगे बढ़ाने के लिये बेमौसमी नर्सरी उगाने के लिये राष्ट्रीय सुविधा प्रदान करता है। इस केन्द्र के शुरु होने के समय से ही कई संस्थानों ( केन्द्रीय पटसन व सम्बद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर और राष्ट्रीय केला अनुसंधान केन्द्र, तिरुचिरापल्लि) द्वारा इस सुविधा का लाभ आसानी और तेजी से प्रजातियों के विकास के लिये किया जा रहा है।

डस (DUS) परीक्षण

गन्ने के डस (DUS) परीक्षण के लिये मूल्यांकन केन्द्र

प्रायःद्वीपीय और पूर्वी तटवर्ति क्षेत्रों से प्राप्त कृन्तकों के डस परीक्षण द्वारा मूल्यांकन के लिये यह केन्द्र संस्थान के दो केन्द्रों में से एक है। पादप प्रजाति संरक्षण एवं कृषक अधिकार (पी.वी.पी. एण्ड एफ.आर.) संस्था द्वारा अनुदानित की गई एक परियोजना इस केन्द्र पर प्रजातियों के मूल्यांकन व पंजीकरण के लिये चलाई जा रही है। इस परियोजना के अन्तरगत 150 से अधिक सन्दर्भ प्रजातियों के संग्रह को एक एकड़ भूमि में अनुरक्षित किया गया है।

अनुसंधान परियोजनायें

अनुसंधान परियोजनायें

कार्यक्रम 11-1-1: जर्मप्लास्म अनुरक्षण, संकरण और बेमौसमी नर्सरी

  1. गन्ने के मूल जर्मप्लास्म का अनुरक्षण
  2. गन्ने का सूदूर संकरण
  3. बेमौसमी नर्सरी

सी.1-07/11-1-2: गन्ने का डस (DUS) परीक्षण

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