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गन्ना प्रजातियों के बारे में आम पूछे गये प्रश्न

  1. आजकल कौन सी सूखा सहनशील प्रजातियां उपलब्ध हैं?
  2. को. 86032, को. 88006, को.टी.एल 88322, को. 95014, को.97008, को. 99004, को. 95003, को. 95006, को. 94012, को. 96009, को.जे.एन 86-600, वी.एस.आई. 9/20, को. 99012, को. 97001 और को. 96023 कुछ सूखा सहनशील प्रजातियां हैं।
  3. जलप्लावन के लिये कौन सी प्रजातियां सहनशील हैं
  4. प्रजातियां, जैसेकि को. 8231, को. 8232, को.8145, को.एस.आई 86071, को.एस.आई 776, को. 8371, को. 99006, 93ए. 4, 93ए.11, 93ए.145 and 93ए.21, जलप्लावन के लिये सहनशील हैं।
  5. लवणताग्रस्त हालातों के लिये कौन सी प्रजातियां सहनशील हैं?
  6. को. 95003, को. 93005, को. 97008, को. 85019, को. 99004, को. 2001-13 को लवणता वाली मृदाओं में समृद्ध संवर्धन करते देखा जाता है। कुछ दूसरी प्रजातियां भी, जैसेकि को. 94012, को. 94008, को. 2000-10, को. 2001-15 और को. 97001, लवणताग्रस्त हालातों के लिये सहनशील हैं।
  7. लोहे की कमी वाले हालातों में कौन सी प्रजातियां बेहतर साबित होंगी?
  8. प्रजातियां जैसेकि को. 8021, को. 86032, को. 86249, को. 88025, को. 94005 और को. 94012 लोहे की कमी वाले हालातों के लिये सहनशील हैं।
  9. कटाई के बाद आने वाली गिरावट के लिये कौन सी प्रजातियां बेहतर सिद्ध होंगी?
  10. प्रजातियां को.सी. 671, को. 7314 और को. 775 को को.जे. 64, को.एस. 510, को. 7240, को.सी. 8001, को. 6907 और को. 62175 से कटाई के बाद आने वाली गिरावट के लिये बेहतर प्रतिरोधि पाया गया। कोयम्बत्तूर में किये गये अध्यन में को.सी. 671 में को. 6304 के मुकाबले कटाई के बाद होने वाली विपरीतता (inversion) के कारण आने वाली गिरावट में कमी देखी गई। को.सी. 671 को यदि 14-16 महीने बाद भी काटा गया हो तो इसमें कम विपरीतता और डैक्सट्रान का बनना देखा गया। .
  11. गुड़ बनाने के लिये कौन सी प्रजातियां अच्छी हैं?
    • आन्ध्र प्रदेश : को. 6907, को.टी. 8201, को. 8013, को. 62175, को. 7219, को. 8014, को.आर. 8001
    • बिहार : को.एस. 767, बी.ओ. 91, को. 1148
    • गुजरात : को.सी. 671, को. 7527, को. 62175, को. 8014, को. 740
    • हरियाणा : को.7717, को. 1148, को. 1158, को.एस. 767
    • कर्नाटक : को. 7704, को. 62175, को. 8014, को. 8011, को.सी. 671, को. 86032
    • मध्य प्रदेश : को. 775, को. 7314, को. 6304, को. 62175
    • महाराष्ट्र : को. 775, को. 7219, को.सी. 671, को. 740, को. 7257, को. 86032
    • उड़ीसा : को. 7704, को. 7219, को. 62175, को. 6304
    • पंजाब : को.जे. 64, को. 1148, को.जे. 81
    • राजस्थान : को. 997, को. 419
    • तमिल नाडू : को.सी. 671, को. 62175, को. 7704, को. 6304, को. 8021, को. 86032, को.सी. 92061
    • उत्तर प्रदेश : को.एस. 687, को.जे. 64, को.1148, को.एस. 767, को.एस. 802, को.एस. 7918, को. 1158, को.एस. 8408, को.एस. 8432, बी.ओ. 91, को.एस. 8315, को.एस. 8016, को.एस. 8118, को.एस. 8119, बी.ओ. 19, को.एस. 837
    • पश्चिम बंगाल : को.जे. 64, को. 1148
  12. पेय पदार्थ बनाने के लिये कौन सी प्रजातियों की रस की गुणवत्ता बेहतर है?
  13. प्रजातियां जैसेकि को.सी. 671, को. 62175, को. 7717, को. 86032, को. 86249 और को. 94012 के रस में शर्करा की उच्च मात्रा होने के साथ हल्के रंग और कम रेशों वाला इनके रस को पेय योग्य बनाने के लिये आवश्यक है।

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