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ADVISORY FOR SUGARCANE MANAGEMENT (Click for Details)

हाल ही की उपलब्धियां - सस्य विज्ञान

खेती प्रणालियां

गन्ने में कार्बनिक खेती प्रणाली

  • गन्ने की कार्बनिक और परम्परागत खेती की प्रणालियों के मुकाबले का एक 10 वर्षीय वर्षीय किया गया। इस अध्यन में कार्बनिक खेती से परम्परागत खेती के मुकाबले उत्पादन में सराहनीय उन्नती देखी गई जिसके साथ साथ जड़ क्षेत्र में सूक्ष्मजीव वनस्पति की क्रियाशीलता में उन्नती भी देखी गई जो कार्बनिक खेती प्रणालियों के दीर्घकालिक होने की क्षमता को प्रदर्शित करता है। पौध फसल में कार्बनिक प्लाट से गन्ना उत्पादन 124 टन/है0 जबकि परम्परागत प्लाट में यह 108 टन/है0 थे, कार्बनिक प्लाट में एन.एम.सी. 1,72,000/है0 था जबकि परम्परागत प्लाट में यह 1,64,000/है0 थे, कार्बनिक प्लाट में 10 महीने पर सी.सी.एस. 11.58% जबकि परम्परागत प्लाट में यह 11.65% थी और 12 महीने पर कार्बनिक प्लाट में सी.सी.एस. 12.94% जबकि परम्परागत प्लाट में यह 12.47% थी।
  • पेड़ी में गन्ने का उत्पादन कार्बनिक उत्पादन प्रणाली से परम्परागत के मुकाबले 13.4% अधिक था। मृदा में कार्बनिक कार्बन और उपलब्ध नेत्रजन की मात्रा कार्बनिक उत्पादन प्रणाली में परम्परागत से क्रमशः 0.08% और 34 किलोग्राम/है0 अधिक थी।
  • कार्बनिक उत्पादन प्रणाली में परम्परागत के मुकाबले पादप परजीवी सूत्रकृमियों की जनसंख्या में कमी जबकि स्वतंत्र सूत्रकृमियों की जनसंख्या में वृद्धि देखी गई।

गन्ने में टपक सिंचाई के साथ उर्वरकों भी देने की प्रणाली

  • खाँचों में टपक सिंचाई द्वारा उर्वरकों को देने से 41% सिंचाई के पानी की बचत हुई और 9.4% अधिक गन्ना उत्पादन देखा गया। पाँच फुट दूरी वाली द्विपंक्ति (2 फुट/3 फुट दूरी) रोपण विधि और 5 फुट x 5 फुट आकार के खड्डों में रोपण कर, 120 दिन तक टपक विधि से उर्वरकों को देने से, दूसरी रोपण विधियों व उर्वरकों को देने की अवधियों के मुकाबले अधिक सार्थक गन्ना व शर्करा उत्पादन देखा गया। इन उपचारों से सिंचाई के पानी में करीब 50% तक की अधिक बचत खाँचों में सिंचाई के मुकाबले देखी गई। दसवें महीने पर रस की गुणवत्ता किसी भी उपचार से प्रभावित नहीं हुई।

सुदूर अनुभव प्रणाली और सुनिश्चित खेती

सुदूर अनुभव प्रणाली और सुनिश्चित खेती

  • हाल ही में सुदूर अनुभव प्रणाली पर कार्य को एन.आर.एस.ए., हैदराबाद के सहयोग से शुरू किया गया और इससे गन्ना उत्पादन क्षेत्रों में पीली पत्ति रोग से संक्रमित क्षेत्रों को पहचानने में उत्साहवर्धक परिणाम मिले हैं। इस अध्यन से उप-पिक्सेल वर्गीकरण माडल विकसित करने की सम्भावना दिखाई देती है जिससे गन्ने के खेतों में पीली पत्ति रोग से प्रभावित क्षेत्रों को बहुत अधिक सूक्षमता के साथ सीमांकित किया जा सकता है।
  • अमरावती चीनी मिल क्षेत्र के किसानों के खेतों में से ग्रिडों के आधार पर मृदा के नमूने लेकर पोषक तत्वों का विश्लेषण किया गया ताकि पोषक तत्वों के स्तर में स्थानिक विभिन्नता का अध्यन किया जा सके। मृदा में पोषक तत्वों के स्तर में स्थानिक विभिन्नता को दर्शाने के लिये इन विश्लेषणों से मृदा मानचित्र रूपांकित किये गये। इन विश्लेषणों के परिणामों से खेतों में पोषक तत्वों के स्तर में स्थानिक विभिन्नता काफी अधिक स्तर की थी। इन परिणामों ने यह दर्शाया की मृदा के संकटमय घटकों जैसेकि पीएच., ई.सी. और पोषक तत्वों की स्थान विशिष्ट विभिन्नता का अध्यन महत्वपूर्ण है। अतः इस क्षेत्र में कार्य कर देखा गया की मृदा की पीएच. का भूमि-सांख्यकि विश्लेषण करने पर पीएच. में अपररूपक (anisotropic) विभिन्नता पाई गई। पीएच. की औसत 7.5 और भिन्नता का स्तर 0.11 था और पेड़ी की फसल में शाखाओं की जनसंख्या का खेत के अन्दर मृदा की पीएच. में विभिन्नता के साथ उल्टा सम्बंध देखा गया। मृदा में नेत्रजन, फास्फोरस और पोटाश की उपलब्ध मात्रा के स्तरों में खेत के अन्दर स्थानिक विभिन्नता अपररूपक थी। अमरावती चीनी मिल के उदुमेलपेट गन्ना विभाग क्षेत्र के किसानों के खेतों के अन्दर ई.सी. में विभिन्नता का एच.आर. ब्रिक्स के साथ उल्टा सम्बंध (आर = 0.58) देखा गया। खेतों के अन्दर पोटाश की उपलब्धता में विभिन्नता का एच.आर. ब्रिक्स के साथ सीधा सम्बंध (आर = 0.71) देखा गया।

पोषण सम्बंधित अध्यन

सर्दियों में शुरू हुई पेड़ी के फुटाव में वृद्धि

  • उपोषणकटिबंधीय क्षेत्रों में सर्दियों में शुरू हुई पेड़ी में फुटाव एक मुख्य समस्या है। करनाल केन्द्र में सर्दियों में शुरू हुई पेड़ीयों के फुटाव में वृद्धि लाने के लिये परीक्षण किये गये। ताज़ी सल्फीटेशन प्रैस मड को 20 टन/है0 की दर से, पोटाश 60 किलोग्राम/है0 + जिंक सल्फेट 25 किलोग्राम/है0 या जिंक सल्फेट 25 किलोग्राम/है0 + सल्फीटेशन प्रैस मड को 10 टन/है0 की दर से पेड़ी की शुरूआत के समय डालने से 45 दिनो पर अधिक फुटाव देखा गया जबकि 75 दिनों पर अधिक शाखायें व कटाई के समय अधिक गन्ना उत्पादन, बिना उपचार के प्लाटों के मुकाबले, देखा गया।

गन्ने में गन्धक के पोषण पर अध्यन

  • फरवरी 2012 में गन्धक के 47 पीपीएम के लिये गन्ने की प्रतिक्रिया जानने के लिये खेत में एक परीक्षण किया गया। इस परीक्षण में गन्धक को 4 स्त्रोतों, नामशः 1. तत्विक गन्धक 2. तत्विक गन्धक गन्धक घोलक (थायोबैसिल्स थायोआक्सिडैंस) के साथ 3. सिंगल सुपर फास्फेट और 4. जिप्सम, के द्वारा दिया गया और इस परीक्षण को एक बिना गन्धक वाले उपचार के साथ आर.बी.डी. में 4 प्रतिकृतियों के साथ लगाया गया। फसल को फरवरी 2013 में काटा गया। गन्धक के साथ उत्पादन अर्थपूर्ण रूप से बढ़ा। कन्ट्रोल के 61.8 टन/है0 के मुकाबले गन्धक के उपचारों से 80.2 टन/है0 की औसत देखी गई जो क्षमता 29.8% अधिक थी (तालिका 1)। सबसे अधिक उत्पादन तत्विक गन्धक + थायोबैसिल्स थायोआक्सिडैंस में 82.7 टन/है0 देखा गया जो बाकी गन्धक के उपचारों के सांख्यिकीय विश्लेषण की दृष्टि से केवल तत्विक गन्धक के 80.4 टन/है0, जिप्सम के 79.3 टन/है0 और सिंगल सुपर फास्फेट के 78.5 टन/है0 के बराबर था। एक गन्ने का भार सबसे अधिक 0.95 किलोग्राम जिप्सम के उपचारित प्लाटों में था जो सांख्यिकीय विश्लेषण की दृष्टि से बाकी गन्धक उपचारित प्लाटों के बराबर था मगर कन्ट्रोल के 0.71 किलोग्राम से अधिक था। एन.एम.सी. और रस की गुणवत्ता के मापदंडों पर गन्धक उपचारों से किसी प्रकार का अर्थपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा।

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