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हाल ही की उपलब्धियां - कीट विज्ञान

मेज़बान पौधों की प्रतिरोधिता

मेज़बान पौधों की प्रतिरोधिता

  • गन्ने के फिनोलिक एसिड्स की पोरी बेधकों के लिये पादप उत्तेजक/निवारक के रूप में कार्य करने की सम्भावित क्षमता को एच.पी.एल.सी. द्वारा पोरी बेधक के लिये निमन्न/उच्च संवेदनशीलता वाले गन्ने के संकरों के तने की स्वस्थ पोरियों से नमूने लेकर परीक्षित किया गया।
  • गन्ने के कृन्तकों को सफेद गिंडार के विरुद्ध मूल्यांकित करने के लिये एक व्यवहारिक गमले में संवर्धन प्रोटोकाल को विकसित किया गया है। इस विधि को प्रयोग कर कई विदेशी कृन्तकों को सफेद गिंडार के विरुद्ध मूल्यांकित किया गया है।
  • कई विदेशी कृन्तकों को उनकी बहुत सारे हानिकारक जीवों के विरुद्ध उनकी प्रतिक्रियाओं के लिये खेत के हालातों में मूल्यांकित किया गया है।
  • प्रयोगशाला में किये गये एक अध्यन में शाखा बेधक के जीव विज्ञानिक अध्यन के लिये प्रतिरोधि इरिएन्थस कृन्तक और संकर को. 86032 का प्रयोग किया गया। इस परीक्षण में प्रतिरोधि इरिएन्थस कृन्तक में को. 86032 से निम्भों की जीवन अवधि अधिक जबकि उनका जीव भार कम था।

जैविक नियन्त्रण

जैविक नियन्त्रण

  • बेसिल्लस थुरिंजीएन्सिस से पहले क्रिस्टल विष, जो स्काराबेड (कोलेओप्टेरा) विशिष्ट है, को भारत से रिर्पोट किया गया है। अन्तर राष्ट्रीय नामकरण समिति द्वारा इस नये बी.टी होलोटाइप क्रिस्टल विष को क्राई8एस.ए1 नाम दिया गया है। तमिल नाडू में पाई जाने वाली स्ट्रेन बी.टी62 से विलगित किये गये क्रिस्टल विष को होलोट्राइकिया सेराटा के सभी इनस्टारों के लिये विषैला पाया गया। इस परिणाम से लगता है की इस क्षमता को कृषि के लिये स्काराबेड की दूसरी महत्वपूर्ण जातियों के प्रबंधन के लिये उपयोग किया जा सकता है।
  • बी.टी पर किये गये आगे के अध्यनों में मृदा के 50 नमूनों से विलगित किये गये 143 में से 3 विलगनों को क्राई1 जीन के लिये सुनिश्चित पाया गया। जब इन जीनों को कलोन कर अनुक्रमित किया गया तब इन जीनों में लेपिडोप्टेरन के क्रियाशील क्राई1ए.सी जीन के साथ 98ः समरूपता देखी गई।
  • कीटरोगजनक कवॅक ब्यूवेरिया बेसिआना का गन्ने में अन्तःपौधीयता को विशिष्ट एस.सी.ए.आर. प्राइमरों की मदद से पी.सी.आर. आधारित विधि से निश्चित किया गया। पौधों से निष्कर्षित डी.एन.ए. को जब कवॅक के 10 विलगनों से उपचारित किया गया तब एन.बी.ए.II-11, एन.बी.ए.II-23, एन.बी.ए.II-47, एन.बी.ए.II-58 और एन.बी.ए.II-61 विलगनों परिवर्धन देखा गया। दूसरे उपचारों और कन्ट्रोल में परिवर्धनों के न पाये जाने ने इन विलगनों के अन्तःपौधिये उपनिवेशन को निश्चित किया।
  • ब्यूवेरिया बेसिआना के दो बेहतर विलगनों, नामशः एन.बी.ए.II-58 और एन.बी.ए.II-61, को प्रयोगशाला में उग्रता के लिये किये गये अध्यन में पोरी बेधक विरोधि पाया गया। गमलों में मैटारिजि़यम एनिसोपलि और दो दूसरे कवॅकों, ब्यूवेरिया बेसिआना और ब्यूवेरिया ब्रोन्गनिआरती, के विलगनों के साथ किये गये एक अध्यन में शाखा बेधक के विलगन (एस.बीएम.ए) को इनाक्यूलेशन के तीन महीने बाद तक सार्वधिक दीघ्रस्थायी पाया गया।
  • कवॅक विषों, नामशः ब्यूवेरसिन, पटुलिन और डैस्टरुकसिन, ने तीन कीटरोगजनक सूत्रक़ृमियों, नामशः ब्यूवेरिया बेसिआना, ब्यूवेरिया ब्रोन्गनिआरती और मैटारिजि़यम एनिसोपलि तथा कुछ दूसरे मृदा कवॅकों के अंकुरण को कम किया एवं उनकी जर्म टयूब के विकास में असमानतायें पैदा की।
  • सी. फलेविपैस के पैरासिटोयड जब कोकून से प्रकट होने को तैयार हों तो खेत में उनके निर्गमन के लिये लकड़ी के छोटे पिंजरों से स्टेशन को विकसित कर विधिमान्य किया गया। संवर्धन अध्यनों में पाया गया की खेत में पैरासिटोयड के निर्गमन से अधिक परजीविकरण पाया गया।

कीट रसायनिक परिस्थितिकी विज्ञान/ कीटनाशी आविष विज्ञान

कीट रसायनिक परिस्थितिकी विज्ञान

  • पोरी बेधक के विरुद्ध प्रतिरोधिता प्रेरित करने के लिये गन्ने के पौधों को जेरानाइल एसिटेट से उपचारित करने पर कोटेसिया फलेविपैस के ब्रैक्नोयड पैरासिटोयड को खिंचता देखा गया जो रसायनों के सहायक लुभावनेपन की तरफ ईशारा करता है।
  • हेनेकोसेन और इसके आइसोमर एन-हेनेकोसेन, जिनको पैरासिटोयड लुभावनों के रूप में जाना जाता है, को गन्ने के पोरी बेधक से संक्रमित पौधों से वाष्पिकृत होते पहचाना गया जो शायद बेधक के पैरासिटोयड को लुभाने की रसायनिक नकल है।

कीटनाशी आविष विज्ञान

  • मृदा में कीटनाशी कलोरैन्ट्रेनिलिपरोल के अवशेषों को तीव्रता से विश्लेषित करने के लिये एक विधि को मानकीकृत किया गया। गन्ने की रेतीली लोम मृदाओं की परिस्थितिकी प्रणाली में कीटनाशी से मृदा को भिगोकर कीटनाशी की अटलता और लोपन गतिकी के अध्यन के लिये इस विश्लेषण विधि का ही प्रयोग किया गया।
  • गन्ने के रस में पहली बार फिप्रोनिल और इसके चयापचयों को साथ साथ अनुमानित करने के लिये एक नवीन, साधारण, संवेदनशील और तीव्र विधि को मानकीकृत किया गया।

कीटरोगजनक सूत्रकृमि

कीटरोगजनक सूत्रकृमि

  • डी.एन.ए. अनुक्रमण के विश्लेषण के आधार पर हैटरोरहब्डाइटिस और स्टइनेरनेमा के वर्गीकरण स्तर को स्थापित किया गया।
  • कीटरोगजनक सूत्रकृमि हैटरोरहब्डाइटिस इंडिका (विलगन डी.एस.एम. 78) को जब 10 अरब/है0 की दर से खेत में उपचार करने से सफेद गिंडार, होलोट्राइका सेरेटा, को 78% तक नियन्त्रित किया जा सका।

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