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हाल ही की उपलब्धियां - सूत्रकृमि विज्ञान

जैविक नियन्त्रण

पादप परजीवी सूत्रकृमि - जैविक नियन्त्रण

  • सूत्रकृमि विरोधि कवॅकों, यथा पाएसिलोमाइसिस लिलेसिनस, ट्राइकोडर्मा विरिडि और ट्राइकोडर्मा हारजि़एनम, को जड़ गाँठ और घावकारक सूत्रकृमिओं के दमन के लिये प्रभावकारी पाया गया।
  • पादप वृद्धि प्रोत्साहक जड़क्षेत्र बैक्टीरियाओं, जो जड़ गाँठ और घावकारक सूत्रकृमिओं के लिये दमनकारी थे, के विलगनों को पहचाना गया।
  • कवॅक और जड़क्षेत्र बैक्टीरियाओं, जिनमें सूत्रकृमि दमनकारी और फास्फेट घोलक क्षमता थी, के विलगनों को पहचाना गया।
  • जैविक नियन्त्रणकों के उच्च स्तर पर उत्पादन के लिये, स्थानिक उपलब्ध सबस्ट्रेटों का प्रयोग कर, कम लागत वाली तकनीकों को विकसित किया गया।
  • सूत्रकृमि भक्षक कवॅक आर्थरोबोटरिस ओलिगोस्पोरा को गन्ने के खेतों से विलगित किया गया और इसकी प्रभावकारिता को गन्ने के पादपसूत्रकृमियों के विरुद्ध परीक्षित किया गया।
  • सूत्रकृमि भक्षक कवॅक आर्थरोबोटरिस ओलिगोस्पोरा को उच्च स्तर पर उत्पादित करने के लिये तरल शीरे वाले माध्यम के प्रयोग को मानकिकृत किया गया।
  • आरब्सकुलर माइकोरहाईज़ल कवॅक को गन्ने के खेतों से विलगित किया गया और उनकी जीवनियन्त्रक जड़ गाँठ और घावकारक सूत्रकृमि विरोधि प्रभावकारिता का परीक्षण किया गया।

एकीकृत नियन्त्रण

पादप परजीवी सूत्रकृमि - एकीकृत नियन्त्रण

  • खेत में जैविक नियन्त्रणकों, पाएसिलोमाइसिस लिलेसिनस, पोकोनिया कलेमाइडोस्पोरिया और स्यूडोमोनस फलुरेसैंस, को एकीकृत पोषण प्रबंधन के साथ मिलाकर प्रयोग करने पर सूत्रकृमियों की जनसंख्या को कम करने के साथ साथ गन्ना उत्पादन में भी वृद्धि देखी गई।
  • एकीकृत सूत्रकृमि प्रबंधन के साथ जैविक खादों (एज़ोस्पिरिलम और फास्फोबैक्टीरिया) को मिलाकर, खेत के हालातों में प्रयोग को, गन्ने के पादपसूत्रकृमियों के विरुद्ध मूल्यांकित किया गया।
  • आरब्सकुलर माइकोरहाईज़ल कवॅकों यथा, गलोमस मोसेआइ और गलोमस फेसिकुलेटम, को 3 सूत्रकृमि जैवनियन्त्रकों यथा, आर्थरोबोटरिस ओलिगोस्पोरा, पाएसिलोमाइसिस लिलेसिनस और पोकोनिया कलेमाइडोस्पोरिया, के साथ मिलाकर प्रयोग कर, गन्ने की प्रजाति को. 86032 में, उन्हें घावकारक सूत्रकृमि प्रेटिलैंक्स ज़ीएइ और जड़ गाँठ सूत्रकृमि मेलोयडोगाइनि जवेनिका के विरुद्ध मूल्यांकित किया गया। इस परीक्षण में सूत्रकृमियों की जनसंख्या को नियन्त्रित करने में आरब्सकुलर माइकोरहाईज़ल कवॅकों की दूसरे जैविक नियन्त्रकों के साथ सहक्रियाशीलता देखी गई।
  • एक जैव सघन एकीकृत सूत्रकृमि प्रबंधन पैकेज जिसे परिस्थितिकी मित्र संघटकों को साथ मिलाकर विकसित किया गया। इस पैकेज में हरित खाद के रूप में फलीदार फसल, जैसेकि पटसन या डैंचा, का प्रयोग रोपण से पहले किया गया; कार्बनिक संशोंधकों के रूप में उपचारित प्रैसमड/खलियान खाद 25 टन/है0 या नीम/कस्ट्रैल केक 2 टन/है0 की दर से रोपण से पहले प्रयोग या मल्च के रूप में गन्ना अवशेषों को 5 टन/है0 की दर से प्रयोगकर इसे मिट्टी चढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान मृदा में मिला देना; छोटी अवधि वाली फलीदार फसलों, जैसेकि सोयबीन और मूंग, को अन्तर फसलों के रूप में उगाना; जैव नियन्त्रकों, जैसेकि पाएसिलोमाइसिस लिलेसिनस या वर्टीसिलियम कलेमाइडोस्पोरियम या ट्राइकोडर्मा विरिडि या स्यूडोमोनस फलुरेसैंस को 20 किलोग्राम/है0 का रोपण के समय प्रयोग और सूत्रकृमिनाशियों, जैसेकि कार्बोफयूरान या फोरेट का 13 किलोग्राम/है0 की दर से दो हिस्सों में, आधी मात्रा रोपण के समय व आधी रोपण के 90 दिन बाद, प्रयोग और अगले साल वहां कार्बनिक संशोधकों या हरि खाद का प्रयोग आवश्यक है ताकि सूत्रकृमिनाशियों के प्रयोग से सूत्रकृमियों का जो नियन्त्रण किया जा सका उसे स्थाई बनाया जा सके।

लक्षण वर्णन

कीट रोगजनक सूत्रकृमियों (कीरोसू): विलगन प्रक्रिया तथा शरीरिकी विज्ञान सम्बंधी और आणविक लक्षण वर्णन

  • हैटरोरहब्डाइटिस और स्टइनेरनेमा जातियों से सम्बंधित कीट रोगजनक सूत्रकृमियों को विभिन्न फसल प्रणालियों से विलगित कर दो दर्जन से अधिक की.रो.सू. विलगनों को संवर्धन संग्रह में अनुरक्षित किया जा रहा है। हैटरोरहब्डाइटिस और स्टइनेरनेमा जातियों/विलगनों के शरीरिकी विज्ञान सम्बंधी और आणविक लक्षण वर्णन के लिये आर.ए.पी.डी.-पी.सी.आर., प्रोटीन मारकरों और आरडी.एन.ए. आई.टी.एस.1, आई.टी.एस.2 तथा 5.8एस. आरडी.एन.ए. का प्रयोग किया गया।
  • जिनोमिक डी.एन.ए. के अनुक्रमों के विश्लेषण का प्रयोग कर की.रो.सू. के 24 विलगनों का आणविक लक्षण वर्णन किया गया। न्यूक्लियस से प्राप्त राइबोसोम जीनों के अन्दर के ट्रान्सक्राइब्ड स्पेसर क्षेत्र के लिये पी.सी.आर. में प्रयुक्त किये गये प्राइमर विशिष्ट थे। परिवर्धन उत्पादन का कार्य थर्मोसाइकलर में किया गया। स्टइनेरनेमा और हैटरोरहब्डाइटिस के लिये 700 से 800 बीपी वाली स्पष्ट पट्टियां देखी गई। पी.सी.आर. उत्पादों को अनुक्रमित किया गया। हैटरोरहब्डाइटिस के 11 आइसोलेटस में से 9, नामशः डी.एस.एम. 8, डी.एस.एम. 22, डी.एस.एम. 67, डी.एस.एम. 78, डी.एस.एम. 81, डी.एस.एम. 85, बी.एन.आर., एल.एन.2 और करनाल3, एच. इंडिका के साथ 99-100 प्रतिशत तक मिलते पाये गए जबकि बाकी 2 एच. बैक्टीरिओफोरा से मिलते पाये गए। स्टइनेरनेमा के 13 में से 9, नामशः एस.बी.आई. 17, एस.बी.आई. 18, 230, 374, सिटरस आइसोलेट, अगली, एच. तीन, करनाल और पूली 1, एस. सियामकायि से 98-99 प्रतिशत मिलते जुलते थे जबकि एल.एन.1 आइसोलेट को एस. गलासेरि से 83 प्रतिशत तक मिलता पाया गया।
  • कीट रोगजनक सूत्रकृमियों के विलगनों में वातावरण सम्बंधी तनावों (गर्मी, सूखा और आक्सीजन की कमी) और फिटनैस (संक्रमण और पुनरुत्पादन क्षमता) सम्बंधित गुणों में आनुवांशिक विविधता का अध्यन किया गया।

उपयोग

गन्ने में हानिकारक जीवों के नियन्त्रण के लिये की.रो.सू.का प्रयोग

  • गन्ने के पोरी बेधक, काइलो सैक्रिफैगस इंडिक्स, और शाखा बेधक, काइलो इन्फसकेटेल्स, के विरुद्ध उच्च क्षमता और संक्रामक्ता रखने वाले की.रो.सू. विलगनों को पहचाना गया है। खेत में की.रो.सू. को प्रयोग करने के लिये उपयुक्त सूखा विरोधि समग्रियों और यू.वी. संरक्षकों की पहचान कर उन्हें पत्तों पर प्रयोग के लिये मानकिकृत किया गया ताकि की.रो.सू.को सूखने से बचाया जा सके और यह खेत में हानिकारक जीवों के विरुद्ध और भी प्रभावी हो सकें।
  • गन्ने के पोरी बेधक काइलो सैक्रिफैगस इंडिक्सए और शाखा बेधकए काइलो इन्फसकेटेल्सए के विरुद्ध की.रो.सू. की कीटरोगजनक कवॅकों का ब्यूवेरिया बेसिआना और ब्यूवेरिया ब्रोन्गनिआरती के साथ सुसंगति के बारे में अध्यन किये गये।
  • सफेद गिंडार से आक्रमित गन्ने के खेतों में से की.रो.सू. को विलगित किया गया। सफेद गिंडार से तत्रस्थ क्षेत्र से विशेषकर 15 की.रो.सू. को विलगित कर भा.कृ.अनु.प. के गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयम्बत्तूर के संवर्धन संग्रह में अनुरक्षित किया गया है।
  • कीटनाशक इमिडाकलोपरिड और की.रो.सू.हैटरोरहब्डाइटिस इंडिका (विलगन डी.एस.एम.78 और बी.एन.आर.) और एच. बैक्टीरिओफोरा (एच.बी) को मिलाकर प्रयोग करने पर इनके सहक्रियाशीलता के अध्यन में सफेद गिंडार एच. सेरेटा के पहले इनस्टार की 100% मृत्युशीलता और तीसरे इनस्टार की 44 से 100% तक मृत्युशीलता देखी गई जो प्रभाव की.रो.सू. के अलग इनाक्यूलेट करने या कीटनाशक इमिडाकलोपरिड के अलग प्रयोग से अधिक थी।
  • कीटनाशक इमिडाकलोपरिड और की.रो.सू. एच. इंडिका (विलगन बी.एन.आर.), एच. इंडिका (विलगन डी.एस.एम.78) और स्टइनेरनेमा सियमक्याइ (करनाल) को मिलाकर प्रयोग करने पर इनके सहक्रियाशीलता के कारण गमलों में किये गये परीक्षण में सफेद गिंडार एच. सेरेटा के तीसरे इनस्टार की 33.4 से 100% तक मृत्युशीलता देखी गई जबकि माइक्रोप्लाटों में परीक्षण करने पर तीसरे इनस्टार की 60 से 75% के बीच मृत्युशीलता देखी गई।
  • कोरोमण्डल सूग्रस लिमिटेड, कृष्णाराजपेट, कर्नाटक में कीटनाशक इमिडाकलोपरिड और की.रो.सू. को मिलाकर प्रयोग कर, गन्ने की प्रजाति को. 86032 के खेत में, इसकी सहक्रियाशील प्रभावकारिता का मूल्यांकन किया गया। की.रो.सू.के इनाक्यूलेशन के 3 तीन हफते बाद गिंडार की 28.5 से 100% तक मृत्युशीलता देखी गई। कीटनाशक इमिडाकलोपरिड और की.रो.सू. को मिलाकर प्रयोग करने पर सार्वधिक 100% मृत्युशीलता देखी गई जिसके बाद अकेले इमिडाकलोपरिड से 72.7% तक मृत्युशीलता देखी गई।
  • खेतों में किये गये दो अन्य परीक्षणों में, गन्ने की प्रजाति को. 86032 में, सफेद गिंडार की जनसंख्या में की.रो.सू.के इनाक्यूलेशन से 43 से 77% के बीच कमी देखी गई।

बड़े स्तर पर उत्पादन

कीट परजीवी सूत्रकृमि - बड़े स्तर पर उत्पादन

  • एच. इंडिका, एच. बैक्टीरिओफोरा, स्टइनेरनेमा कार्पाकैप्से, एस. गलासेरि और एस. सियमक्याइ को इन वीवो और इन विटरो में उच्च स्तर उत्पादन के लिये तकनीकों को मानकिकृत किया गया है।
  • की.रो.सू., एस. गलासेरि और एच. इंडिका के लिपिड एगर माध्यम पर पैट्रि प्लेटों में एकल संवर्धन प्रक्रियाओं को मानकिकृत किया गया। विभिन्न माध्यमों को परीक्षित करने पर एस. गलासेरि का सार्वधिक उत्पादन माध्यम में मुर्गी के अंडे, ताड़ का तेल और यीस्ट निष्कर्षण मिलाने पर प्राप्त हुआ। इन विटरो में उत्पादित की.रो.सू. को गलेरिया मैलोनैला के विरुद्ध परीक्षित करने पर उनकी 33 से 100% तक मृत्युशीलता देखी गई।
  • की.रो.सू. के सूत्रिकरण को टेल्क पाउडर, एलजीनेट ग्रैन्यूल्स और जैल माध्यम पर मानकिकृत किया गया है।

आविष अध्यन

की.रो.सू.के सहजीवी बैक्टीरिया फोटोरहैब्डस / ज़ीनोरहैब्डस स्पीसिस से प्राप्त नये कीटनाशक विषों और सूक्ष्मजीव विरोधि पदार्थों का अन्वेषण और उपयोग

  • की.रो.सू. के सहजीवी बैक्टीरियों फोटोरहैब्डस और ज़ीनोरहैब्डस को उनकी कीटनाशी और कवॅकनाशी क्रियाशीलता के लिये अन्वेषित किया गया जिसने इन सहजीवी बैक्टीरियों का हानिकारक जीवों के नियन्त्रण और रोगजनक कवॅकों के प्रबंधन के लिये उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया है।

सहजीवी बैक्टीरियों का विलगन तथा उनका जीवरसायनिक और आणविक लक्षण वर्णन

  • की.रो.सू. से संक्रमित गलेरिया मैलोनैला से 15 सहजीवी बैक्टीरिया (फोटोरहैब्डस / ज़ीनोरहैब्डस स्पीसिस) को आइसोलेट किया गया। ग्राम नेगेटिव रोडस को पहचानने के लिये इन आइसोलेटस का जीव रसायनिक चरित्र चित्रण किया गया। इन परीक्षणों के लिये साइट्रेट उपयोग, लाइसिन उपयोग, ओरनिथाइन उपयोग, यूरिऐस पहचान, फिनाइलएलानिन डीएमिनेशन, नाइट्रेट रिडक्शन और हाइड्रोजन सल्फाइट उत्पादन का प्रयोग किया गया। इसके अतिरिक्त 5 कार्बोहाइड्रेट उपयोग परीक्षण भी किये गये जिसमें ग्लुकोस, एडोनिटोल, लैक्टोस, अरैबिनोस और सोरबिटोल का प्रयोग किया गया।
  • सहजीवी बैक्टीरियों का आणविक चरित्र चित्रण जिनोमिक 16एस. आरडी.एन.ए. के परिवर्धित अनुक्रमों के विश्लेषण से किया गया। जीव प्रौद्योगिकी सूचना के राष्ट्रीय केन्द्र से प्राप्त अनुक्रम जीन बैंक के डाटाबेस के साथ 16एस आरडी.एन.ए. का तुलनात्मक अध्यन किया गया। सभी ज़ीनोरहैब्डस विलगनों की सार्वधिक समरूपता ज़ीनोरहैब्डस स्टोकिआई के साथ और फोटोरहैब्डस के विलगनों की समरूपता फोटोरहैब्डस लयूमिनिसेंस के साथ पाई गई।

सफेद गिंडार एच. सेरेटा और गलेरिया मैलोनैला के डिम्भों के विरुद्ध ज़ीनोरहैब्डस की कीटनाशक क्रियाशीलता का परीक्षण

  • ज़ीनोरहैब्डस स्टोकिआई के पांच संवर्धनों से प्राप्त बैक्टीरिया कोशिकाओं और कोशिका रहित निस्यंदों को सफेद गिंडार एच. सेरेटा के प्रथम इनस्टार और गलेरिया मैलोनैला के पूर्ण विकसित डिम्भों के विरुद्ध इनकी कीटनाशक क्रियाशीलता का परीक्षण किया गया। सभी बैक्टीरिया विलगनों को इनकी कीटनाशी गंणों के लिये जाना जाता है और इन्होंने गलेरिया में मृत्युशीलता दिखाई। विलगनों में से ज़ीनोरहैब्डस स्टोकिआई (एस.बी.आई.एक्स.एस. 10) के कारण सफेद गिंडार की सार्वधिक मुत्युशीलता (96.6%) और ज़ीनोरहैब्डस स्टोकिआई (एस.बी.आई.एक्स.एस. 52) के कारण गलेरिया मैलोनैला की सार्वधिक मुत्युशीलता (83.3%) देखी गई।

ज़ीनोरहैब्डस स्टोकिआई के विषैले चयापचयों का शुद्धिकरण

  • दो सहजीवी बैक्टीरियों यथा, ज़ीनोरहैब्डस स्टोकिआई (एस.बी.आई.एक्स.एस. 52) और (एस.बी.आई.एक्स.एस.डी. 4) के कीटनाशी चयापचयों की शुद्धता के लिये कोशिकाओं रहित सतह पर तैरते पदार्थ को इथाईल एसिटेट के प्रयोग से अलग कर उसकी कीटनाशक क्रियाशीलता का गलेरिया मैलोनैला के विरुद्ध अध्यन किया गया।

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