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को. 99004 (दमोदर)

प्रजाति के गुण

लोकार्पण वर्ष 2007
लोकार्पण सूचना भारत का असाधारण राजपत्र [भाग II- अनुभाग 3 (ii)], कृषि मंत्राल्य, कृषि और सहकारिता विभाग, 6 फरवरी, 2007
पैतृक को. 62175 x को. 86250
लोकार्पण के लिये सिफारिशी क्षेत्र मध्यम देरी से पकने वाली प्रायद्वीपीय भारत के लिये उपयुक्त (गुजरात, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश के अन्दरूनी इलाके, तमिल नाडू, कर्नाटक और केरल)
चयन विधि गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयम्बत्तूर में सबसे पहले 1999 में पहचानी गई। शुरुआती मूल्यांकन परीक्षण में इसे 14 स्थानों पर लगाया गया। उच्च स्तरीय प्रजाति परीक्षण में इसे दो पौधों और एक पेड़ी फसलों के लिये 2004-05 और 2005-06 के दौरान, परीक्षित किया गया। इसके लिये कुल 34 (12 प्रथम पौधा फसल, 12 दूसरी पौधा फसल और 10 पेड़ी फसल) परीक्षण किये गये।
समान्य प्रदर्शन घटक गन्ने का औसत उत्पादन 115.5 टन/है0 और रस में 19.8% शर्करा पाई गई। रेशे की मात्रा 14.0% पाई गई। इसमें ब्याँतों के उत्पादन की क्षमता कम है जिस कमी को उच्च एकल गन्ने के भार ने पूरा किया। इसका गुड़ सुनहरी पीले रंग का ए.1 गुणवत्ता वाला है। खेत में इस प्रजाति में बहुत बढि़या गुण - जैसेकि शुरूआती जोरदार वृद्धि, गहरे हरे पत्ते, गन्ने ऊँचे लम्बे, जो गिरते नहीं हैं और बिना कांटों और फटाव वाले, पाये जाते हैं।
रोग प्रतिक्रिया लाल सड़न रोग प्रतिरोधि, प्लग और नोडल विधियों से और विल्ट प्रतिरोधि भी
अन्य गुण सूखा व लवणता के लिये सहनशील; पोरी बेधक के लिये प्रतिरोधि; बहुत कम पुष्पण
शरीरिक विज्ञान की दृष्टि से विभिन्नता वाले गुण पत्ति की शीथ पर कोई बाल नहीं, लिग्यूल फीते के आकार का, आउरिकल डैटनोयड और ओसगोद हरी। पोरी का रंग पीलापन्न लिये हुए हरा, बेलनाकार, वृद्धि के कारण आये फटाव के बिना, कार्क धब्बे उपस्थित और छाल पर मोम की भारी परत। कलिका अण्डाकार, मध्यम आकार, कलिका खाँचा अनुपस्थित, कलिका गद्दी उपस्थित और कलिका की चोटी वृद्धि छल्ले को छूती हुई।

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